ऊपर लिखीं भाषाओं के नाम देख रहे हैं ? हम ग्लोबल वॉइसेस के आलेखों का अनुवाद कर विश्व की सिटिज़न मीडिआ को सब तक पहुंचाते हैं।

नेटिज़ेन रपट: सेंसरशिप – भारत में बढ़त, कैमरून में घटत

कश्मीर में 2010 बारकैम्प तकनीक कार्यशाला के लिए बना एक बैनर फ़्लिकर के माध्यम से एहसान कुदुसि द्वारा फोटो (CC BY-SA 2.0)

ग्लोबल वॉइसेस एडवोकेसी की नेटिजन रपट दुनिया भर के इंटरनेट अधिकारों के परिपेक्ष्य में चुनौतियों, जीत और उभरती रुझानों का एक अंतरराष्ट्रीय जायजा पेश करती है।

भारतीय-प्रशासित कश्मीर के प्राधिकारी वर्ग ने फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर सहित 22 सामाजिक मीडिया अनुप्रयोगों पर रोक लगा दी है।

26 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक राज्य परिपत्र में कहा गया है कि कश्मीर घाटी में सोशल मीडिया सेवाओं का “राष्ट्रीय-विरोधी और विरोधी-सामाजिक तत्वों” द्वारा “शांति” भंग करने हेतु दुरुपयोग किया जा रहा है और इसे 30 दिनों तक अवरुद्ध किया जा सकता है।अन्य प्रतिबंधित साइटों में क्यूक्यू, बैडु, वीचैट, गूगल प्लस, स्काइप, Pinterest, स्नैपचैट, यूट्यूब और फ़्लिकर शामिल हैं।

यह कदम कश्मीर में बढ़ती अशांति के मद्देनज़र उठाया गया है। भारत के सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत “गड़बड़ी” वाले इलाकों में तैनात भारी-भरकम रणनीति के विरोध में, व्यक्तिगत और सामाजिक मीडिया दोनों में छात्र विरोध,हाल के दिनों में तेज हो गए हैं

ईज़ीन डेलीओ में प्रकाशित लेख में अंगशुकांता चक्रवर्ती ने संदेह प्रकट किया कि सोशल मीडिया को कश्मीर में इसलिए निशाना बनाया गया था क्योंकि उसने भारतीय अधिकारियों द्वारा चित्रित तस्वीर के इतर एक अलग बयानी दिखायी थी:

कश्मीर की कहानी का दूसरा रुख प्रस्तुत कर स्थानीय लोगों ने एक बार फिर से अपने आप में बहुत ही जटिल और विवादित कश्मीर की कहानी बयां की, जिससे सरकार को बहुत असहजता महसूस हुई और उसके आचरण की नैतिकता पर भी सवाल उठ खड़े हुए।

इस रोक से व्यवसायों को भी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है, लगभग 15,000 कर्मचारियो वाले स्थानीय आईटी सेक्टर का काम बंद होने से ई-कॉमर्स और इंटरनेट-आधारित व्यवसाय ठप्प पड़ गए हैं ।

इस बीच, केंद्रपाड़ा के भारतीय शहर में, प्रांतीय अधिकारियों ने एक “आपत्तिजनक” वीडियो, जिसमें कथित रूप से पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया गया था, के प्रसार को रोकने के लिए 48 घंटे के लिए इंटरनेट सम्पर्क को अवरुद्ध कर दिया था। यह प्रतीत होता है कि इस निलंबन के साथ अधिकारी अप्रैल की शुरुआत में नजदीकी शहर भद्रक में हिंदू देवताओं के बारे में अपमानजनक संदेश वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट से भड़की सार्वजनिक अशांति जैसी घटना की पुनरावृति नहीं होने देना चाहते थे।

बेहतर समाचार में, कैमरून की सरकार ने 94 दिनों के लिए बंद करने के बाद देश के अंग्रेजी बोलने वाले क्षेत्रों में इंटरनेट का उपयोग अंततः बहाल कर दिया। यह ब्लैकआउट स्कूलों और अदालतों में फ्रांसीसी भाषा को लागू करने और फ्रैंकोफोन और एंग्लोफोन जनसंख्या के बीच सार्वजनिक सेवाओं के प्रावधान में कथित भेदभाव के विरोध में उत्तरी एस्ट और साउथ एस्ट क्षेत्रों में किए प्रदर्शन का नतीजा था। कैमरून की कुल जनसंख्या का लगभग 20% एंग्लोफोन हैं। सरकार ने सेवा बहाल तो की पर इस धमकी के साथ की यह रोक दुबारा लगाई जा सकती है अगर उन्हें लगा कि इंटरनेट “कैमरूनियनों के बीच नफरत और विभाजन को हवा देने वाला एक उपकरण” बन रहा है।

मालदीवी ब्लॉगर का क़त्ल

मालदीव के ब्लॉगर और कार्यकर्ता यमीन रशीद को 23 अप्रैल, 2017 की अलसुबह चाकू से गोदकर मार दिया गया। सरकार और कट्टरपंथी धर्म आधारित राजनीति के एक मुखर आलोचक, रशीद ने पुलिस को पहले भी बताया था कि उन्हें पाठ संदेश और सोशल मीडिया के माध्यम से मौत की धमकी मिली थी। मालदीवी रशीद की मृत्यु के कारणों की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग कर रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंज कार्यालय, जहां रशीद आईटी तकनीशियन थे, उनके सम्मान में एक दिन के लिए बंद कर दिया।

मानवाधिकार पक्षसमर्थन करने पर सऊदी महिला पर मुकदमा

राज्य विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने और अन्य मानव अधिकारों के रक्षकों की रिहाई की मांग करने के लिए दो सामाजिक मीडिया खातों का निर्माण करके सार्वजनिक आदेश का उल्लंघन करने के आरोपों पर गिरफ्तार होने के एक वर्ष बाद सऊदी इंटरनेट कार्यकर्ता नाइमा अल-मेतरूड मुकदमे का सामना कर रही है। गल्फ सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स सऊदी अरब में अल-मेतरूड समेत हिरासत में रखे अन्य सभी मानवाधिकार रक्षकों की तत्काल रिहाई की मांग कर रहा है।

अमेरिकी मीडिया की रपट को स्थानीय भाषा में अनुवाद करने के लिए इंडोनेशियाई वेबसाइट पर नोटिस

इन्डोनेशियाई सेना प्रमुख जनरल गाटोट नूरमंत्यो ने एक अन्य समाचार वेबसाइट द्वारा प्रकाशित जांच रिपोर्ट का अनुवाद और प्रकाशन करने के लिए इंडोनेशिया की प्रेस परिषद में स्वतंत्र समाचार वेबसाइट Tirto.id की नालिश की है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कुछ सैनिक अधिकारी राष्ट्रपति जोको विदोडो को सत्ता से बेदख़ल करने की साजिश में शामिल थे और उनका ISIS से संबंध है।

मूल रूप से अमेरिका स्थित साइबर सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता-केंद्रित समाचार साइट द इंटरसेप्ट द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल नूरमंत्यो साजिश में शामिल थे।

हाउस कमिशन III के सदस्य अहमद साह्रनी ने जनरल नूरमंत्यो द्वारा लिए इस कदम की प्रशंसा करते हुए कहा, “टीएनआई प्रमुख ने एक अच्छा कदम उठाया है क्योंकि मेरा मानना ​​है कि वह एक ऐसे चक्र में फंसना नहीं चाहेंगे जो विनाशकारी सिद्ध हो सकता है।”

क्या ब्रिटिश पुलिस मैलवेयर का उपयोग कर रही है?

वाइस मीडिया तकनीक ब्लॉग मदरबोर्ड पर प्रकाशित एक रपट के अनुसार, लंदन पुलिस के एक अफसर ने लक्षित निगरानी सॉफ्टवेयर फ्लेक्सीस्पाई खरीदा, जिससे उपयोगकर्ता मोबाइल फोन और कंप्यूटर पर मैलवेयर इंस्टॉल कर सकता है और उन्हें फोन कॉल को अवरुद्ध करने, दूर से माइक्रोफोन चालू कर सकने और संक्रमित डिवाइस के कैमरे से तस्वीरें लेने की सुविधा मिल सकती है। यह स्पष्ट नहीं है कि इस अधिकारी ने यह सॉफ्टवेयर व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदा या आधिकारिक।

कनाडा की नेट तटस्थता के लिए मंजूरी

कनाडाई रेडियो-टेलीविज़न और दूरसंचार आयोग (सीटीआरसी) ने एक नया नियामक ढांचा जारी किया जो दृढ़ता से नेट तटस्थता (न्यूट्रैलिटी), जो कि एक सिद्धांत है जिसके तहत दूरसंचार प्रदाताओं को इंटरनेट पर सभी सामग्री को किसी निश्चित सामग्री को ग्राहकों के लिए तेजी से वितरण के बजाय एक समान रूप से वितरित करना चाहिए, का समर्थन करता है। आयोग ने शून्य रेटिंग के अभ्यास और चयनित इंटरनेट सेवाओं के लिए मुफ़्त पहुंच प्रदान करने के खिलाफ एक निर्णय भी जारी किया। शून्य-रेटिंग योजनाएं इंटरनेट सामग्री के असमान प्रयोग का प्रतिनिधित्व करती हैं, क्योंकि वे सेवा प्रदाताओं को यह स्वतंत्रता दे देती हैं कि वे यह निर्धारित करें कि फलां सेवाएं ग्राहक आसानी से एक्सेस कर सकते हैं और फलां नहीं।

नई रिसर्च

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Mahsa Alimardani, Ellery Roberts Biddle, Vishal Manve, Inji Pennu, Carolina Rumuat, Nevin Thompson, Laura Vidal  और Sarah Myers West ने इस रिपोर्ट के लिए योगदान दिया.

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