आलेख परिचय युद्ध और संघर्ष

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संघर्ष और दुखांत से परे फलीस्तीन की जिंदगी दिखाती तस्वीरें

ह्यूमन्स ऑफ पैलेस्टाइन का लक्ष्य है मानवता को बचाए रखना. वह भी ऐसे समय में जब फलीस्तीनी सपनों और किस्सों से भरपूर लोगों की बजाए, साजिशों के कारण मौत, भूले जाने वाले नामों और विकृत शवों तक सीमित हो गए हैं

इराक : श्याम रंग – विषाद का रंग

इराकी स्त्रियाँ शोक और विषाद के रंग - काले रंग - की अभ्यस्त हो चुकी हैं. इनसाइड इराक में यह बात कही गई है. अंधेरे और उदासी के श्याम रंग से इतर अब कुछ युवा स्त्रियाँ भूरे, हरे और गुलाबी परिधानों को अपना रही हैं !

दक्षिण अफ्रीकाः विदेशियों की हत्या का दोषी कौन?

दक्षिण अफ्रीका में विदेशी व बाहरी लोगों पर हुये हालिया हमलों के लिये डेविड सरकार को दोषी ठहराते हैं: “विदेशियों से जितनी नफरत दक्षिण अफ्रीकी करते हैं उतना शायद कोई नहीं करता। दक्षिण अफ्रीका आधिकारिक रूप से विश्व का सर्वाधिक ज़ीनोफोबिक (xenophobic) देश माना जाता है। नफरत तक ठीक है...

भारत: जयपुर बम धमाका, आतंकवाद और सरकार

13 मई को लगातार हुए बम धमाकों ने जयपुर को हिलाकर रख दिया . विविध रपटों के अनुसार, कोई 60 से अधिक लोग मारे गए व 150 से अधिक लोग घायल हुए. जयपुर जो कि अपेक्षाकृत एक शांत शहर है, के बारे में तथा धमाकों से हुए अफरातफरी के बारे...

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जापान : यौन दासियों की लंबित मांगों पर ध्यान खींचते वीडियो

  23 अप्रैल 2008

द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने के साठ साल से अधिक बीत जाने के बाद भी जापानी सेना के आदेशों के तहत अपहृत की गई स्त्रियाँ अब भी न्याय की बाट जोह रही हैं. इन स्त्रियों को सैनिक “आराम गृहों (कम्फ़र्ट स्टेशन) ” में यौन दासियों के रूप में जबरिया...

श्रीलंकाः बम धमाका और अनवरत संघर्ष

  7 अप्रैल 2008

श्रीलंकाई सरकार के एक महत्वपूर्ण मंत्री और वरिष्ठ सांसद जयराज फर्नांडोपुल्ले की लिट्टे ने हत्या कर दी। बम धमाका करने वाला एक मेराथन धावक का भेस धरकर आया था। डिफेंसनेट ने घटना की जानकारी दी है पर इस पोस्ट पर कुछ गर्म बहस भी हई और यह आम श्रीलंकाई नागरिक...

इरानः अमरीकी सैनिक और इराकी बच्चे

रज़ेनो ने इराक में बच्चों की देखरेख करते अमरीकी सैनिकों की कई तस्वीरें प्रकाशित की हैं। इस चिट्ठाकार का कहना है कि इरानी मीडिया कभी ऐसी तस्वीरें नहीं छापता। भले ही युद्ध एक स्याह दास्तां हो पर इनमें मानवीय संवेदनायें भी तो शामिल रहती हैं।

यूक्रेनः प्रदर्शनी का सच?

मॉस्को में होलोडोमोर प्रदर्शनी में कलाविध्वंस (वैंडेलिज़्म) की घटना पर वहाँ के मेयर युरी लुज़कोव ने कहा, “मुझे लगता है कि इस प्रदर्शनी का बस एक ही मकसद थाः रूसी और युक्रेनी लोगों का एका तोड़ना और उनमें दरार पैदा करना।” यूक्रेनियाना इस तर्क को होलोकास्ट के परिपेक्ष्य में भी...

आर्मीनियाः खुला पत्र

तुर्की लेखक व चिट्ठाकार मुस्तफा अक्योल की आर्मीनियाई जातिसंहार विषय पर आप्रवासी आर्मीनियाई को लिखे खुले पत्र का जवाब “लाईफ इन आर्मीनिया” चिट्ठे के लेखक रफी ने तुर्की नागरिकों को लिखे अपने खुले पत्र से दिया है। 1915 से 1917 के बीच हुई घटनाओं को जातिसंहर का दर्जा देते हुये...

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शुक्रिया! पर फ़िलहाल नहीं।