आलेख परिचय चुनाव

चुनावों का लोकतंत्रीकरण: इलेक्टोरल बॉन्ड पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक करार देकर, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भाजपा के कड़े विरोध के बावजूद, राजनीतिक समानता, चुनाव पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया।

कैसे भारत के नए जमाने के इंफ्लूएंसर्स चुनावी खेल को आकार दे रहे हैं?

  21 अप्रैल 2024

आम चुनावों से पहले, भारतीय राजनीतिक दल अपनी पहुंच और भागीदारी को अधिकतम करने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया का लाभ उठा रहे हैं।

आम चुनाव 2009: कुछ तथ्य, कुछ मिथक

  16 अप्रैल 2009

16 अप्रेल 2009 को, भारत में आम चुनाव के पहले दौर की शुरुवात होगी और यह सिलिसिला 13 मई, 2009 तक चलेगा। 1947 में प्राप्त आजादी के बाद यह भारत का 15वां आम चुनाव है। पढ़िये विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनावों के बारे में कुछ रोचक तथ्य।

अप्रवासी भारतियों का मतदान अधिकार

  16 अप्रैल 2009

लॉ एंड अदर थिंग्स चिट्ठे ने विदेशों में काम कर रहे या पढ़ रहे भारतियों को मतदान का अधिकार देने के कानूनी पक्ष की चर्चा करते हुये लिखा है, “इन्हें मतदान का अधिकार देने से उन्हें राजनीतिक रूप से सक्रीय बनाये रखने में मदद मिलेगी। साथ यह भी एहसास भी...

चुनावों पर भौगोलिक मैशअप

  15 अप्रैल 2009

मैपमाईइंडिया ने भारतीय मतदाताओं के लिये एक सेवा शुरु की है जिसके द्वारा वे आगामी लोकसभा चुनावों में सही मत देने हेतु जानकारी पा सकें। इस जालस्थल पर मतदाता अपने मतदान क्षेत्र के बारें में विस्तृत जानकारी पा सकते हैं जिसमें पार्टी और उनके प्रत्याशियों का लेखाजोखा सम्मिलित है।

भारतीय चुनावों में सेलिब्रिटी शक्ति

  15 अप्रैल 2009

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान मुम्बई की एक रैली में काँग्रेस के उम्मीदवार मिलिंद देवरा के लिये चुनाव प्रचार करते हुयेचित्र: अल ज़जीरा, क्रियेटिव कॉमंस लायसेंस के तहत प्रयुक्त भारतीय फिल्म कलाकारों और फिल्मकारों का समाज पर खासा प्रभाव रहता है और डैनी बॉयल ने अपनी फ़िल्म स्लमडॉग मिलियनेयर ने इसे...

आम चुनावों में लगी जनता की पैनी नज़र

  14 अप्रैल 2009

हम जिस युग में रह रहे हैं वहाँ जानकारियों का अतिभार है। ज्यों ज्यों नवीन मीडिया औजार ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बना रहे हैं, साधारण लोग भी अपना रुख और अपने इलाके की मौलिक खबरें मीडिया तक पहुंचा रहे हैं। ट्विटर और अन्य सिटिज़न मीडिया औजारों की बदौलत...

केन्याः वोटरों के तीन विष

  13 दिसम्बर 2007

कुमेकूचा किन्याई वोटरों की तीन दिक्कतों पर ध्यान दिलाते हैं, “कबिलाई, भष्ट्राचार और छोटी याद्दाश्त। ये तीन विष हैं जो हमें 27 को वोट डालने के पहले अपने शरीर से झाड़ उतारने होंगे।”