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अंतरिक्ष के लिए यात्रा जीती, लेकिन पृथ्वी पर घूमने को स्वतंत्र नहीं

ब्रिटिश-मुस्लिम मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हुसैन मनावर ने एक कमर्शियल अंतरिक्ष यान पर सवारी का एक यात्रा टिकट जीता है। उन्होंने कहा कि अगले साल वे इस ग्रह की उपरी कक्षा में होंगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लेते वक्त उन्हें हर बार सुरक्षा जाँच में रोका जाता है। (चित्र आभार: हुसैन मनावर)

हुसैन सोचते हैं कि शायद किसी मनहूसियत की वजह से उन्हें इतनी बार रोका जाता है। उनसे लॉस एंजेलेस से लेकर मैसेडोनिया तक हवाई अड्डों पर पूछताछ की गई है, लेकिन अब उन्हें नहीं रोका जाता क्योंकि वे सब उन्हें पहचानने लगे हैं, वे मज़ाक में कहते हैं।

“मैं सिर्फ यह पता लगाने की कोशिश कर रहा हूँ कि इस धारणा को कि सभी मुस्लिम आतंकवादी हैं को ध्वस्त करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है” वे कहते हैं।

मनावर पाकिस्तानी मूल के हैं लेकिन एसेक्स, इंग्लैंड में बड़े हुए हैं। उनकी लिखी एक कविता ने उन्हें एक अंतरिक्ष उड़ान जिताया और वे पहचाने जाने लगे। थाईलैंड में एक भाषण उन्होंने कहा, “मेरा नाम हुसैन मनावर है, और मैं आतंकवादी नहीं हूं।” मनावर कहते हैं यह उन्होंने कई जातीय भेदभाव वाली घटनाओं के अनुभव के जवाब में कहा।

यह पूछने पर कि उन्हें कितनी दफा पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, वे कहते हैं, “मैंने हिसाब रखना छोड़ दिया,”। “मुझे बेशुमार बार रोका गया है।”

अंतरिक्ष यात्रा जीतने के लिए प्रतियोगिता का आयोजन क्रूगर कवने के उभरता सितारा कार्यक्रम द्वारा 18 से 30 साल के लोगों के लिए किया गया था। 90 से अधिक देशों से तीस हजार प्रतिभागियों ने 2018 में उड़ान भरने वाले XCOR एयरोस्पेस लिंक्स वाणिज्यिक अंतरिक्ष यान पर स्थान पाने के लिए प्रतिस्पर्धा में भाग लिया।

विजेता प्रविष्टि एक कविता थी जिसका शीर्षक था “मेरा नाम हुसैन है”। यह एक तीन मिनट का कविता पाठ था जो एक लड़के द्वारा उसकी माँ को लिखे सुसाइड नोट के रूप में शुरू होता है, लेकिन यह बाद में पता चलता है कि वो माता वास्तव में माँ प्रकृति है।

यहाँ मनावर निर्णायकों और एक दर्शकों के सामने यह प्रदर्शन कर रहे है:

“यही तो मेरा काम है, मैं एक कवि हूँ। मैं मानव जीवन की बेहतरी और सामाजिक व भावनात्मक सीख देने के लिए के लिए कविता लिखता हूँ । यही कारण है कि अंतरिक्ष इस चर्चा में आया। मैं इस प्रतियोगिता में प्रवेश केवल इसलिए करना चाहता था ताकि मेरे काम को अधिक गंभीरता से लिया जाये,” मनावर कहते हैं।

उनके यूट्यूब चैनल, हुसैन के घर पर उनके भाषण और मजेदार वीडियो है। लेकिन उनका ध्यान हमेशा मानसिक स्वास्थ्य और इसके जुड़े कलंक पर रहता है।

प्रतियोगिता जीतने के बाद से 26 वर्षीय मनावर इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए व्याख्यान देते रहे हैं। अपने एक दोस्त के अवसाद का निदान किये जाने के पश्चात वो इस मुद्दे के प्रति उत्साही हो गये, लेकिन उनके अपने परिवार को यह बताने में असहज महसूस करते रहे। मनावर अब मानसिक स्वास्थ्य के बारे में नियमित रूप से बाहर बोलते हैं और उम्मीद करते हैं की उनकी अंतरिक्ष यात्रा यह मुद्दा उठाने के लिए उन्हें और अधिक अवसर देगी।

“मैं मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बहुत भावुक हूँ। मेरा मानना ​​है कि हम एक सुंदर समय में हैं, तथापि सोचता हूँ कि हम जितने जुड़े हुए हैं उतने ही कटे हुए भी हैं। आजकल दुनिया के किसी दूसरे में बैठे व्यक्ति संपर्क करना ज्यादा आसान है बनिस्बत अपने ही कमरे के दूसरे कोने में बैठे किसी शख्श से बात करना।”

मनावर का कहना है कि उन्होंने अंतरिक्ष में जाने का कभी सपना नहीं देखा, और हालांकि वह मिले अवसर के लिए आभारी है, उन्हें अभी भी यकीन नहीं कि अंतरिक्ष यात्रा उनके लिए उपयुक्त है।

“ईमानदारी से कहुँ तो मैं वास्तव में नहीं जाना चाहता … हालांकि मैं स्पष्ट रूप से इसके साथ आगे जाना चाहता हूँ।”

एंड्रिया क्रोसन द्वारा रचित यह कहानी मूल रूप से PRI.org पर 23 मार्च, 2017 को दिखाई दी। PRI और गलोबल वॉइसेस की साझेदारी के अंतर्गत पुनर्प्रकाशित।

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