ऊपर लिखीं भाषाओं के नाम देख रहे हैं ? हम ग्लोबल वॉइसेस के आलेखों का अनुवाद कर विश्व की सिटिज़न मीडिआ को सब तक पहुंचाते हैं।

· दिसम्बर, 2007

आलेख से राउंडअप से दिसम्बर, 2007

रूसः ओका

टर्किश इंवेज़न ओका नामक कार के बारे में लिखते हैं, “मास्को में पिज्ज़ा डेलिवरी के लिये ओका कार का भारी प्रयोग होता है, क्योंकि जाहिर तौर पर सर्दियों में बाईक चलाने की तुलना में यह ज्यादा गर्म रहता है। पर इसे चलाने वाले शौकीन अब मुट्ठी भर ही बचे हैं, ज्यादातर रूसी बैंकों से आसान लोन लेकर शानदार एसयूवी चलाना पसंद करते हैं। नई ओका कार की कीमत लगभग 3000 डॉलर यानि तकरीबन 1.20 लाख रुपये है।”

रूसः कास्परोव राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर

गैरी कास्परोव ने राष्ट्रपति पद की चुनावी दौड़ से खुद को बाहर कर लिया है क्योंकि वे समूह मीटिंग के लिये कोई स्थल नहीं खोज पाये। साइबेरियन लाईट मायूस हैं कि कास्परोव ने बाहर जाने के लिये ये बहाना बनाया। “मेरा अनुमान है कि कास्परोव के निर्णय का असल कारण है कि उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिये ज़रूरी २० लाख हस्ताक्षर जुटाने की कोई उम्मीद नहीं थी और अगर वे इस प्रयास में ही असफल हो जाते तो ये राजनीतिक आत्महत्या ही हो जाती।”

जमैका: कौड़ियों के दाम जिस्म

स्टनरर्स एफ्लिक्शन कहते हैं, “जी हाँ, ये नौ से ग्यारह जमात की लड़कियाँ अपने जिस्म महज़ 10 जमैकन डॉलर (लगभग 0.14 अमरीकी डॉलर या साढ़े 5 रुपये) में बेच रही हैं। इसे रोकने के लिये कुछ तो करना ही चाहिये।”

रूसः एसयूपी और लाईवजर्नल

रोपर्ट एमस्टर्डम ब्लॉग लाईवजर्नल को हाल में खरीदने वाली कंपनी एसयूपी के निदेशक से सीएमएस वायर द्वारा लिये साक्षात्कार की निंदा करते हुये लिखता है, “रिपोर्टर ने बड़े नर्म सवाल पूछे और खास मुद्दों पर कोई पूछताछ नहीं की, मसलन अगर सुरक्षा एंजेसियाँ खास चिट्ठाकारों की व्यक्तिगत जानकारी चाहे तो एसयूपी की नीति क्या होगी।”

मिस्रः यूट्यूब ने बहाल किया खाता…पर

मिस्र के चिट्ठाकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता वेल अब्बास के यूट्यूब और याहू खातों को बहाल कर दिया गया है जिन्हें मिस्र की पुलिस द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित लोगों के विडियो पोस्ट करने के कारण स्थगित कर दिया गया था। पर वे खुश क्यों नहीं हैं यह जानने के लिये उनका चिट्ठा पढ़ें।

केन्याः वोटरों के तीन विष

कुमेकूचा किन्याई वोटरों की तीन दिक्कतों पर ध्यान दिलाते हैं, “कबिलाई, भष्ट्राचार और छोटी याद्दाश्त। ये तीन विष हैं जो हमें 27 को वोट डालने के पहले अपने शरीर से झाड़ उतारने होंगे।”

सूडानः एड्स से लड़ने का गलत तरीका

सूडान में जे़रबा एक पोस्टर को “मौत का पोस्टर” पुकारते हुये निंदा करते हैं जिसमें इलाज व बचाव के तरीके बताये बगैर मानव खोपड़ी और हड्डियों के सहारे लोगों को एड्स के खतरों के प्रति अगाह किया गया है। वे लिखते हैं कि एड्स अब कोई मौत की सज़ा नहीं रह गई है। गलत संदेश से “वायरस और बढ़ेगा” और “संक्रमितों को और अधिक कलंकित” माना जाने लगेगा।

मिस्रः लालची सेना

“इस बात के सबूत मिल रहे हैं की सेना सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण के बारे में और लालची होती जा रही है, खास तौर पर जब मौके की ज़मीन और व्यवसायों की बात हो।” लिखते हैं मिस्र से द अरेबिस्ट जो सेना द्वारा कैरो के नज़दीक कुरसाया द्वीप के अधिग्रहण की योजना के बारे में खबर दे रहे हैं

मलेशियाः दूसरों के बैग से रखें परहेज़

रॉकी मलेशियाई लड़कियों को आगाह करते लिखते हैं कि वे विदेश प्रवास के समय दूसरों के बैग ढोने से बचें। हाल ही में ऐसी घटनायें हुई हैं जिनमें ड्रग स्म्गलरों ने मलेशियाई औरतों की जानकारी के बिना उनके बैगों को वाहक के रूप में इस्तेमाल किया।

इरानः नारों की सचाई

फोटो ब्लॉगर कुसुफ़ ने एक गंदी दीवार के चित्र प्रकाशित किये हैं जहाँ महमूद अहमदिनेज़ाद के 2005 के राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार के समय के पोस्टर अब भी दिखते हैं। पोस्टर पर खुशहाली और चैन के वायदे हैं। कुसुफ़ पूछते हैं कि उन नारों का क्या हुआ? वो कहते हैं कि न ही खुशहाली के संकेत मिले हैं और न चैन के।

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शुक्रिया! पर फ़िलहाल नहीं।