ऊपर लिखीं भाषाओं के नाम देख रहे हैं ? हम ग्लोबल वॉइसेस के आलेखों का अनुवाद कर विश्व की सिटिज़न मीडिआ को सब तक पहुंचाते हैं।

· नवम्बर, 2007

आलेख से राउंडअप से नवम्बर, 2007

हाँगकाँगः पॉप स्टार ने की रक्षा

यूट्यूब और अन्य स्थानीय विडियो शेयरिंग जालस्थलों पर हाँगकाँग के पॉप स्टार एंडी लाउ द्वारा एक प्रशंसक की अपने ही सुरक्षा गार्डों से रक्षा करते दिखाता एक विडियो खासा चर्चित है।

यूक्रेनः प्रदर्शनी का सच?

मॉस्को में होलोडोमोर प्रदर्शनी में कलाविध्वंस (वैंडेलिज़्म) की घटना पर वहाँ के मेयर युरी लुज़कोव ने कहा, “मुझे लगता है कि इस प्रदर्शनी का बस एक ही मकसद थाः रूसी और युक्रेनी लोगों का एका तोड़ना और उनमें दरार पैदा करना।” यूक्रेनियाना इस तर्क को होलोकास्ट के परिपेक्ष्य में भी सही पाते हैं, “क्या वे ओश्विट्ज़, बुख़ेनवाल्ड और ट्रेबेलिंका के संग्रहालय इसलिये नहीं बचाये रखें हैं ताकि जर्मन और यहूदियों के बीच नफ़रत पैदा हो?”

ब्राज़ीलः सुरक्षा की कलई खुली

पीई बॉडी काउंट एक ऐसे मामले की रपट दे रहे हैं जिससे पेरनांबुको, ब्राज़ील में सुरक्षा व्यवस्था के नदारद होने का पता चलता है। वहाँ सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव सेर्विल्हो पाईवा की सरकारी कार ही चोरी हो गई। कार अगली सुबह बरामद हो गई पर उसमें से दोनों सुरक्षा गार्डों की बंदूकें गायब थीं।

गाँधी के बाद भारत

लॉ एंड थिंग्स रामचंद्र गुहा की किताब “इंडिया आफ्टर गाँधी” की विभिन्न समीक्षाओं के बारे में लिख रहे हैं

ब्राज़ील: इंटरनेट बिना सब सूना

मंगलवार से बिना इंटरनेट जी रहीं और साइबरकैफे से ब्लॉगिंग कर रही गैबरीला ज़ागो ब्राज़ीलियाई टेलिकॉम सेवा को अब तक की सबसे खराब सेवा करार देती हैं, “उन्होंने हमें फोन से इत्तला दी केबल चोरी हो गये हैं और अगले दिन समस्या को सुलझा लिया जायेगा, जबकि अगले दिन यानि गुरुवार को प्रोक्लेमेशन डे की छुट्टी थी।” उन्हें यकीन है कि समस्या एक हफ्ते से पहले नहीं सुलझने वाली।

जापानः फिंगरप्रिंटिग तकनीक

एडो जापान में विदेशियों की फिंगर प्रिंटिंग नीति के तकनीकी पक्ष की जानकारी दे रहे हैं।

भारतः टॉयलेट नक्को

इंडिया डेली विवरण दे रहा है कि किस तरह 80 फीसदी भारतीय बिना शौचालय के काम चलाते हैं। ज़िक्र करने का मौका भी दुरुस्त है क्योंकि इसी हफ्ते भारत में सातवाँ विश्व शौचालय महासम्मलेन भी आयोजित हो रहा है।

आर्मीनियाः खुला पत्र

तुर्की लेखक व चिट्ठाकार मुस्तफा अक्योल की आर्मीनियाई जातिसंहार विषय पर आप्रवासी आर्मीनियाई को लिखे खुले पत्र का जवाब “लाईफ इन आर्मीनिया” चिट्ठे के लेखक रफी ने तुर्की नागरिकों को लिखे अपने खुले पत्र से दिया है। 1915 से 1917 के बीच हुई घटनाओं को जातिसंहर का दर्जा देते हुये वे लिखते हैं कि इस बकाया घटना का हमेशा के लिये हल निकालने का यह सही समय है ताकि आर्मीनियाई और तुर्क आगे बढ़ सकें और “अंततः एक दूसरे का साथ शाँतिपूर्वक जीना शुरु कर सकें”।

इरानः अमरीकी सैनिक और इराकी बच्चे

रज़ेनो ने इराक में बच्चों की देखरेख करते अमरीकी सैनिकों की कई तस्वीरें प्रकाशित की हैं। इस चिट्ठाकार का कहना है कि इरानी मीडिया कभी ऐसी तस्वीरें नहीं छापता। भले ही युद्ध एक स्याह दास्तां हो पर इनमें मानवीय संवेदनायें भी तो शामिल रहती हैं।

लेबनानः पंथ बनी पहचान?

लेबनानी चिट्ठाकार एम बीबीसी पर भीड़ का अनुसरण करने का आरोप लगाते हैं क्योंकि वो जिन लोगों का साक्षात्कार लेती है उनकी पहचान उनके संप्रदाय से करती है।

ब्राज़ीलः चिट्ठाकार ही करतें हैं बहस शुरु

एमलॉग एक समाचार के बारे में बता रहे हैं जिसमें ये रपट दी गई है कि ब्राज़ीलियाई इंटरनेट पर होने वाली बहसों का एक तिहाई हिस्सा ब्लॉगमंडल से ही शुरु होता है। “तर्क देने के अलावा जब वे ब्राँड या उपभोग के रुख के बारे में के बारे में लिखते हैं तो उपभोक्ताओं के निर्णय पर भी प्रभाव छोड़ते हैं।”

चीनः विश्वविद्यालयों में गोल्फ संस्कृति

झ्यूयाँग चीनी विश्वविद्यालयों में गोल्फ संस्कृति की निंदा करते हैं। उन्होंने पाया कि अन्य देशों में छात्र ऐसे खेलों का आनंद लेते हैं जिनमें शारीरिक चुनौती पर बल दिया जाता हो जैसे फुटबॉल य बास्केटबॉल जबकि गोल्फ बस अपनी “क्लास” दिखाने का खेल भर है।

मिस्र: क्या इज़्राइल भयभीत है?

“मुझे इस बात का कारण समझ नहीं आता कि इज़्राइल अरब या किसी भी अन्य इस्लामी देश के पास अपना परमाणु कार्यक्रम होने की बात पर इतना खौफ़जदा रहे। मुझे कोई तार्किक कारण नहीं नज़र आता जो इज़्राइली कर रहे हैं चाहे हो इरान के खिलाफ विश्व को बरगलाने की बात हो या मिस्र या KSA की शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम शुरु करने की घोषणा करने पर निंदा हो।”, मिस्र की चिट्ठाकार जेनोबिया लिखती हैं

रूस: मदिरा में लिप्त

विंडो आन यूरेशिया के मुताबिक रूसी विश्व स्वास्थ्य संस्था द्वारा खतरनाक घोषित सीमा से तीन गुना ज्यादा शराब पीते हैं और अमरीकियों की तुलना में आठ गुना ज़्यादा।

उज़बेकिस्तान: पुरातन कृषि

जोशुआ फाउस्ट रपट दे रहे हैं कि लंदन स्थित उज़बेकिस्तानी दूतावास ने नाराज़ शब्दों में उन खबरों का खंडन किया है जिनमें ये आरोप लगाये गये थे कि वहाँ कपास चुनने के लिये बच्चों का इस्तेमाल होता है या उन्हें इस काम के लिये मजबूर किया जाता है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि सत्तावाद की बपौती के रूप में मिली प्राकृतिक आपदा, अक्षमता और मासूमों का शोषण उनके मुल्क की प्रगति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।

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शुक्रिया! पर फ़िलहाल नहीं।