आभा मोंढे · सितम्बर, 2014

मैं एक फ्रीलांसर पत्रकार (संपादक) के तौर पर जर्मनी की अंतरराष्ट्रीय प्रसारण सेवा के हिन्दी विभाग में काम करती हूं. कथक में गांधर्व महाविद्यालय से अलंकार हूं. कई साल नृत्य सिखाया है और यूरोप के कई देशों में कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए हैं. हिन्दी में लिखना पढ़ना मेरी रुचि है.

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नवीनतम लेख आभा मोंढे से सितम्बर, 2014

संघर्ष और दुखांत से परे फलीस्तीन की जिंदगी दिखाती तस्वीरें

ह्यूमन्स ऑफ पैलेस्टाइन का लक्ष्य है मानवता को बचाए रखना. वह भी ऐसे समय में जब फलीस्तीनी सपनों और किस्सों से भरपूर लोगों की बजाए, साजिशों के कारण मौत, भूले जाने वाले नामों और विकृत शवों तक सीमित हो गए हैं

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