ऊपर लिखीं भाषाओं के नाम देख रहे हैं ? हम ग्लोबल वॉइसेस के आलेखों का अनुवाद कर विश्व की सिटिज़न मीडिआ को सब तक पहुंचाते हैं।

गेम ऑफ़ थ्रोंस और पर्यावरण में बदलाव: गर्मी से सावधान!

तस्वीर: PXhere के सौजन्य से सार्वजनिक डोमेन में मौजूद. https://pxhere.com/en/photo/780571

कासिया मोरेस.

एक ऐसी दुनिया की कल्पना कीजिये जहाँ एक अभूतपूर्व खतरे को नजरअंदाज कर के राजनैतिक गुटों में आपसी लड़ाई चल रही है. एक ऐसा खतरा जो मानवीय सीमाओं से परे पूरी सभ्यता के ऊपर मंडरा रहा है.

14 अप्रैल से प्रसारित होने वाली गेम ऑफ़ थ्रोंस की अगामी कड़ी को इसी कथानक से समझा जा सकता है. मृतकों की सेना दीवार तोड़ चुकी है. अब वेस्टेरोस की किस्मत समय की दीवार पर टंगी है. इसी परिदृश्य में दुनिया की मौजूदा राजनीति भी समझी जा सकती है जहाँ डोनाल्ड ट्रम्प और जेर बोल्सोनारो जैसे नेता बड़े खतरे से बेखबर अपने समकक्ष शक्ति समूहों के खिलाफ अपनी मोर्चा खोले बैठे हैं. जब हमारे सामने पर्यावरण का खतरा हमें निगलने को तैयार खड़ा है तो ऐसे नेता पुराने तानाशाहों की स्तुति-गान और धन-कुबेरों की रक्षा के लिए बनायी जाने वाली दीवार जैसे मुद्दों से असल समस्या से ध्यान भटका रहे हैं.

एचबीओ द्वारा निर्मित इस श्रृंखला में वेस्टेरोस की रक्षा में कई गौरवशाली राजघराने तबाह हो जाते हैं. हमारे इस दुनिया में भी स्थिति काफी अलग नहीं है. पर्यावरण की बदहाली के लिए ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार आज के विकसित देश अपनी गतिविधियों की जवाबदेही नहीं उठा रहें तो चाइना जैसा नया उभरता शक्ति-केंद्र इनके इसी रवैये की आड़ में आज ग्रीन-हाउस गैस उत्पादन करने में शीर्ष पर शुमार है. यह बात सही है कि सामूहिक जवाबदेही के सिद्धांत के आधार पर विकाशसील देश अपनी गतिविधियों को सही ठहरा सकते हैं पर इस दौड़ की वजह से आने वाला खतरा इनके लिए भी उतना ही क्रूर साबित होगा. वाइट वाल्कर्स के उपमा से व्यक्ति-केन्द्रित लाभ के लिए अपनाई जानी वाली ‘प्रिजनर्स डिलेमा‘ रणनीति का भ्रमजाल आसानी से समझा जा सकता है. अगर वाइट वाल्कर्स के खिलाफ वेस्टेरोस की हार होती है तो सरसी या किसी अन्य के बैठने के लिए कोई राजगद्दी भी नहीं होगी.

ऐसी क्या वजह है कि दीवार के उत्तर से आने वाले खतरे के खिलाफ समूचा वेस्टेरोस एकजुट नहीं है? इसके तर्क में यह कहा जा सकता है कि अपने पूर्वजों के अनुभव से अलग ऐसे किसी खतरे की तैयारी करना जो आज तक कभी आया ही नहीं है, मुश्किल साबित हो सकता है. शायद यही वजह थी कि जॉन स्नो ने अपनी जिंदगी खतरे में डाल कर एक ‘जीवित’ वाइट वॉकर को पकड़ने की जहमत उठायी (अगर ऐसा कुछ होता है तो). धारावाहिक की पटकथा में डॉन क्यूहोत की छवि में क़ैद जॉन स्नो शायद अपनी इस कोशिश अपने पक्ष में राजनैतिक एका बनाने की कोशिश कर रहा था. भला कोई भी किसी जिंदा प्राणी द्वारा काटे जाने के बाद उसकी मौजूदगी कैसे नकारेगा?

ये देखना दिलचस्प होगा कि वाइट वॉकर की मौजूदगी साबित होने के बाद लोगों के रवैये में क्या बदलाव आता है. मूल रूप से तीन तरह की प्रतिक्रिया देखि जा सकती है, जिन्हें हम मौजूदा पर्यावरण खतरे के संदर्भ में भी देख सकते हैं:

1. समस्या-निवारक प्रतिक्रिया

शायद अब तक आप को वाइट वॉकर (या पर्यावरण समस्या) पर विश्वास नहीं था पर अब जबकि तथ्य आप के सामने हैं तो आप उनके खतरे को भांपते हुए अपने निर्णय पर दोबारा विचार करेंगे. यही हाल डेनेरिस टारगेरियन का है, जिसने सत्ता की अपनी चाहत को फिलवक्त दरकिनार करते हुए सामने पड़े संकट को तवज्जो दिया है. यही चुनाव जेमी लैनिस्टर ने भी किया है. अपनी बहन के प्रति अपनी शाश्वत वफादारी को नजरअंदाज करते हुए मौजूदा खतरे से निपटने के लिए उसने अपने पुराने दुश्मनों के साथ गठजोड़ के लिए हामी भर दिया है. इसी क्रम में जॉनस्नो ने एक कदम और आगे बढाते हुए अपने दुश्मन के सामने अपनी सामरिक नीति खोलते हुए उन्हें वाइट वॉकर को मारने की तरकीब सिखाई है. असल जिंदगी में एलोन मस्क द्वारा सभी टेस्ला एकाधिकारों को छोड़ना यही साबित करता है कि बदहाल दुनिया में किसी के पास कोई प्रतियोगी बढ़त मुकम्मल नहीं है.

2. गठजोड़ में शामिल ना होना 

ऊपर अंकित किरदारों की तरह ही यूरोन ग्रेजोय का भी अपना एक नजरिया है. वाइट वॉकर से भिडंत के बाद उसकी सांसारिक दृष्टिकोण में ख़ासा परिवर्तन आया है. इस के बावजूद उसने डेनेरिस टारगेरियन के नेतृत्व वाली सेना में शामिल होना उचित नहीं समझा. जब जॉन स्नो ने यह साबित कर दिया कि वाइट वॉकर तैर नहीं सकते हैं तो उसने सरसी को छोड़कर अपने द्वीप पर वापस जाने का फैसला किया है जहाँ वह मृतकों की सेना से सुरक्षित रह सकता है. इतना ही नहीं बल्कि वह डेनेरिस को भी यही सलाह देता है और कहता है कि जब यह संकट टल जाएगा तो वह दोनों दुनिया पर शासन कर सकते हैं.

लेकिन क्या तब दुनिया में ऐसा कुछ बचेगा जिस पर शासन किया जा सके?

अगर हम पर्यावरण तथा सामूहिक गठजोड़ के अपने मुद्दे पर वापस आते हैं तो अमरीका या ब्राज़ील जैसे देशों के सामने टवालू या प्रशांत महासागर के अन्य द्वीपों की तुलना में खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है. हालांकि अपनी सुरक्षा के प्रति यह आश्वस्ति उनका भ्रम है. इस खतरे से कोई अछूता नहीं रहेगा.

3. मुझे ठंड से कभी समस्या नहीं रही 

सरसी यह मानती है कि जब बाकि दुनिया ठंड से मर रही होगी तो उसकी शक्ति ना केवल अक्षुण्ण रहेगी बल्कि बढ़ जायेगी. उसने ना केवल गठजोड़ का हिस्सा होने से मना कर दिया है बल्कि छोटे लाभ के लिए वह उन पर आक्रमण करने की योजना बना रही है. जीवाश्म इंधन से चलने वाले अपने उद्द्योगों को बचाने के लिए रूस और सऊदी अरब जैसे देश भी अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ का विरोध करते रहे हैं. उनके इस निर्णय से कुछ समय के लिए उनकी अर्थव्यवस्था मजबूत जरूर होती है पर इस से पर्यावरण संकट के चपेट में आई उनकी जनसँख्या सुरक्षित नहीं रह सकेगी.

वाइट वॉकर और पर्यावरण संकट, दोनों से उपजी संकट का स्वरुप अनिश्चित है. दोनों ही संकट से हम परिचित नहीं हैं और उनसे निपटने के लिए हमारे पास समय की बेहद कमी है. पिछले 25 सालों से संयुक्त राष्ट्र की सभाओं में बैठक में शामिल हो रहे वैश्विक नेतृत्व पर अब स्कूली बच्चों द्वारा बहसबाजी छोड़कर काम पर ध्यान देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. ब्राज़ील ने अगले वार्षिक बैठक की अपनी मेजबानी से भी इंकार कर दिया है. इस से आपसी सामंजस्य का एक और अवसर बंद हो गया है.

गेम ऑफ़ थ्रोंस से हम समझ सकते  हैं कि अगर बच्चों की चीख नजरअंदाज की गयी तो अंजाम कितने भयावह हो सकते हैं. जैसे ही डेनेरिस का एक ड्रैगन नाईट किंग के कब्जे में आता है वैसे ही मृतक सेना की शक्ति में बेहिसाब इजाफ़ा होता है. एक झटके में इस से पूरी स्थिति बदल जाती है. मौत का मंजर अब साफ़-साफ़ सामने दिख रहा है.

इसी तरह पर्यावरण में होने वाले बदलाव से अचानक स्थिति इतनी विषम हो सकती है कि पीछे लौटने के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएँ. इस प्रक्रिया के बारे में निश्चित तौर [आर कुछ कह पाना संभव नहीं है पर इस से धरती के तापमान में 1 से 3 डिग्री की वृद्धि हो सकती है. यह प्रक्रिया समय के साथ तेज हो सकती है. पर्यावरण में होने वाले बदलाव अगले कई सदी तक कायम रहते हैं. तापमान में बढ़त से ऐसी स्थिति उत्पन्न होगी जो तापमान में तेजी के लिए ही सहायक होगी. अब भी समय है कि हम ऐसी नीतियों को लागू करने के लिए दबाव बनाएं जिस से तबाही को रोका जा सके और ऐसे बदलाव पर लगाम लग सके जिस से हमेशा के लिए मानव सभ्यता के अंत पर ठप्पा लग जाएगा.

कैसिया मोरेस यूथ क्लाइमेट लीडर्स की सीईओ  और संस्थापक है. उन्होंने और कोलंबिया विश्वविद्यालय से एमपीए की डिग्री अर्जित की है तथा अभी रियो डी जनेरिओ में लेमैन फेलो बोर्ड की सदस्या हैं. 2019 के यूथ फेलो लीडर्स कार्यक्रम के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें. 

बातचीत शुरू करें

लेखक, कृपया सत्रारंभ »

निर्देश

  • कृपया दूसरों का सम्मान करें. द्वेषपूर्ण, अश्लील व व्यक्तिगत आघात करने वाली टिप्पणियाँ स्वीकार्य नहीं हैं।.

पाईये दुनिया भर से रोचक कहानियाँ सीधे अपने इनबॉक्स में

* = required field
शुक्रिया! पर फ़िलहाल नहीं।