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कोरिया: मेरी उम्र न बढ़ाओ

कोरिया में आयु गणना के दो तरीके हैं, कोरियाई तरीका और पश्चिमी तरीका। आधिकारिक रूप से कोरियाई तरीका ही मान्य है। जैसे ही आपका जन्म होता है आप एक साल के हो जाते हैं। इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप किस माह पैदा हुये (जैसे कि 31 दिसंबर), अगले वर्ष (यानि 1 जनवरी को) आपकी आयु दो साल हो जायेगी। आयु गणना के इस कोरियाई तरीके से कुछ समय पहले तक न तो दिक्कते थीं और न ही कोरियाई लोग इस की शिकायत करते थे। पर जैसे जैसे कोरियाई लोगों के अन्य जगह के लोगों से मिलने के अवसर बढ़ते जा रहे हैं अपनी आयु बताने के मामले में वे उतना ही चकरा जाते हैं। और उन्हें ये एहसास हो रहा है की समान आयु के गैर कोरियाई लोगों की तुलना में उन्हें बड़ा माना जाता है। इसके अलावा, आयु गणना में इस भेद और असम्मति से कम्फर्ट वुमेन (दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिक वैश्यालयों में कार्यरत औरतें) के वक्तव्य को हाल ही में लगभग झूठे कथन मान लिया गया।

बिलाशक कोई जल्दी बूढ़ा नहीं होना चाहता। एक जाल प्रयोक्ता ने आयु गणना के कोरियाई तरीका को पश्चिमी तरीके से एकीकृत करने की अपील एक जालस्थल “नेटीज़न अपील” में की। इस अपील के कई जवाब मिले।

हाल ही में कानूनी माप की इकाईयाँ बदलीं और अब हम इनका सार्वजनिक प्रयोग करते हैं। मैं आशा करता हूँ कि आयु गणना अंतर्राष्ट्रीय रुख के मुताबिक बदले।

कोरियाई पुरुषों को लगता है कि सैन्य सेवा के कारण दो साल उनके जीवन से छीन लिये जाते हैं…और फिर कोरियाई आयु पद्धति के मुताबिक 1-2 साल जोड़े जाते रहने से…मुझे लगता है जैसे में कई साल खो रहा हूं।

ज्यादातर जाल प्रयोक्ता इस अपील का समर्थन कर रहे हैं। इसको बदलने का कई कारण उभरे हैं, विदेश में निवास, अन्य देशों के लोगों से मिलने के अवसर और जवां रहने की तमन्ना।

गर्ल नीना लिखती हैं

मैंने अपनी उम्र की पश्चिमी तरीके से गणना की है क्योंकि मैं कई साल विदेश में रही। अब मैं भ्रमित हो जाती हूँ जब कोरियाई मेरी उम्र पूछते हैं।

पर इस अपील के विरोधी भी हैं। बोमडोल कहते हैं

मैं इस का विरोध करता हूं। ऐसा लगता है कि हमारी अपनी संस्कृति को निकाल बाहर करने का रिवाज़ बन गया है। ये अच्छा नहीं है।

MC7L कहते हैं,

ज़िंदगी के सम्मान का फलसफा। मैं सोचता हूं कि कोरियाई आयु पद्धति नैतिक रुप से ज़रुरी है…दूसरे देश बदलें, हम नहीं।

हनीउल वूमुल बताते हैं कि किस तरह उम्र को कोरिया में महत्व दिया जाता है। (कोरियाई भाषा में बातचीत के लिये आपेक्षित उम्र पता होना जरूरी है। किसी अपरिचित से पहली भेंट में उम्र पूछना परिचय का पहला कदम होता है। इसके बाद वे तय कर सकते हैं कि किसे कैसे पुकारना है।)

हम जैसे हैं, मुझे पसंद हैं। आयु की गणना हमारी संस्कृति है। हमें एकीकरण की क्या ज़रूरत है? और फिर…उम्र का इतना महत्व नहीं है। खास तौर पर अन्य देशों में उम्र ज्यादा लोगों को नहीं बताई जाती।

 

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